# हवाओं का संघर्ष !!

By [Usha](https://paragraph.com/@usha) · 2022-08-07

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हवाओं ने की कोशिश बात समझाने की , संसार ने अवहेलना किया आवाम को जागरूख करने तूफान हो गए , सवाल उठे , ये तबाही क्यों ? कहा , बदलाव लाना था बदनाम हो गए !

शरारत ये तुम्हारी बच्चों का खेल नहीं कपडे मैले हो गए आँखों में पड़ गए धूल

रुख बदलने का मक़सद था आँखों से हटाना धूल मैं ही उच्च मैं ही श्रेष्ठ कपडे जो मैले हो गए तुम्हारी है ये भूल

सर्द हवाओं का दोष है ? जो ठिठुर रही उंगलियां , ज्वालामुखी की चाह किसे, बस धधकने दो चिंगारियाँ

![yay!](https://storage.googleapis.com/papyrus_images/b84725e126e604980a7b4ca6a97dfe2d0ac617fcc72b630d0d793e07e66d9adc.jpg)

yay!

हवाओं के संघर्ष में किसी ने क्या लाया , बांसुरी में धुन तो एक फूंक से ही आया

ऋतुओँ के बदलने पर ही तो सारे गुण पाया ये अहम क्यों? ऐ हवा , तू अपनी पहचान तो बता , ये दर-ब -दर क्यों फिरना , ज़रा ठहर के दिखा !

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*Originally published on [Usha](https://paragraph.com/@usha/5rGOpWZ5L5KEwy1gKBpj)*
